(1) यमुनोत्री 4 धाम यात्रा का पहला स्थान है।यह जानकी चट्टी से करीब 6 किमी की दूरी तय करने के बाद यमुनोत्री पहुंचा जाया जाता है । यही पे स्थित यमुना मंदिर क़ो जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं शताब्दि में बनवाया था। पुरानी कथाओं के अनुसार यमुना सूर्य भगवान की पुत्री थी और यम नाम का बेटा था।
इसी वजह यम अपने बहना यमुना (नदी )में खुशीपूर्वक स्नान किए हुए इंसानों के साथ सख्ती का व्यवहार नही करता है। यमुना का जन्म स्थल यमुनोत्री से करीब 1 किमी दूर 4421 मीटर की ऊंची चोटी पर स्थित यमुनोत्री मंदिर है। यमुनोत्री मंदिर के निकट कई गर्म पानी के कुंड हैं जो अनेक सेतु से होकर जाती है है।
इनमें सबसे ज्यादा सूर्य कुंड प्रसिद्ध है। कहा जाता है अपनी बेटी को खुश होकर आर्शीवाद देने के लिए भगवान सूर्य ने गर्म जल का रूप धारण किया था भक्त इसी कुंड में चावल और आलू कपड़े में लपेटकर कुछ समय तक छोड़ दिया जाता हैं, जिससे वह पक जाता है। आने वाले भक्त पके हुए इन चावल और आलू को प्रसाद के रूप घर ले जाते हैं।
